मलेरिया संक्रमण से फैलने वाली एक घातक बीमारी है जो मलेरिया से संक्रमित मादा एनोफेलीज मच्छर के काटने से फैलता है।इस तरह के रोगों को डॉक्टरी की भाषा में पेरासाइटिक रोग कहा जाता है।मलेरिया से संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर में प्लास्मोडियम पाया जाता है जब ये मच्छर आपको डंक मारते हैं तो अपने डंक के साथ मे ये आपके शरीर में पैरासाइट नामक जीवाणु को छोड़ देते हैं।जिसके फलस्वरूप आपके शरीर पर 10 से 12 दिनों में मलेरिया के लक्षण जाहिर पड़ने लगते हैं। इन जीवाणुओं को परजीवी जीवाणु की संज्ञा दी गई है। मलेरिया जैसी बीमारी उष्णकटिबंधीय छेत्रो (अफ्रीका एशिया) में अधिक प्रभावी होती है।

मलेरिया बुखार के तेजी से फैलने का एक और मुख्य कारण भी है। जैसे कि जब अन संक्रमित मादा एनोफेलीज मच्छर किसी मलेरिया से संक्रमित रोगी को डंक मारने के बाद किसी अन्य व्यक्ति को डंक मारती है। तो पेरासाइटिक जीवाणु उस मच्छर के सहारे दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते है।तथा 10 जे 15 दिनों में ही व्यक्ति के शरीर में मलेरिया के लक्षण दिखाई पड़ने लगते हैं।जैसे जैसे रोग बढ़ता जाता है वैसे वैसे ही व्यक्ति के शरीर का खून पतला होता चला जाता है।मलेरिया से बचाव के विषय मे शिथिलता बरतने पर इस रोग से रोगी की जान भी जा सकती है।आइये आगे बढ़ते हैं और जानते हैं मलेरिया रोग के लक्षण व उपचार क्या हैं? के विषय में विस्तार से।
मलेरिया के लक्षण
पेरासाइटिक जीवाणुओं (मलेरिया) से संक्रमित व्यक्तियों के शरीर पर कुछ ही दिनों में कई तरह के लक्षण दिखाई देने लगते है।यदि उचित समय में शरीर पर दिखाई देने वाले इन लक्षणों को पहचान कर मलेरिया का सही इलाज समय से किया जाय तो इस मलेरिया बुखार नामक जानलेवा बीमारी को आसानी से मात दिया जा सकता है। और इस बीमारी से होने वाली ढेरों परेशानियों से बचा जा सकता है।आय जनते हैं कि मलेरिया बुखार का लक्षण क्या है?
- तेज बुखार
- मतली का आना
- उल्टी का आना
- पेट मे दर्द का होना
- मल त्याग करते समय खून आना
- शरीर को हमेशा ठण्ड लगना
- शरीर में खून की कमी
- सिर दर्द
- मांसपेशियों में हमेशा दर्द रहना
- कोमा
- बार बार दस्त का आना
मलेरिया के प्रकार / मलेरिया कितने प्रकार के होते हैं?
पैरासाइटिक जीवाणुओं से फैलने वाले मलेरिया रोगों को मुख्यतः चार प्रकार के वर्गों में विभाजित किया गया हैं। जिनकी पुष्टि कई तरह के वैज्ञानिक रिसर्च के द्वारा की गई है।मलेरिया हिंदी के इस लेख में आइए जानते हैं पैरासाइटिक बीमारियों के इन चार वर्गों के संबंध में विस्तार से-
प्लासमोडियम ओवले plasmodium owle
प्लासमोडियम ओवले दुनिया का सबसे जटिल पेरासाइटिक मलेरिया जीवाणु है।प्लास्मोडियम ओवले से संक्रमित मच्छर यदि किसी व्यक्ति को एक बार काट लेता है तो उस व्यक्ति के शरीर में ये जीवाणु कई वर्षों तक बने रहते हैं जिससे मलेरिया रोग होता है।पूर्वी अफ्रीका में इस पेरासाइटिक मलेरिया का प्रभाव अधिक देखने को मिलता है।
प्लासमोडियम मलेरया plasmodium maleriya
ठंड लग कर आने वाला बुखार में सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि इस तरह के लक्षण प्लासमोडियम मलेरिया हो सकता है।ये अन्य मलेरिया बुखार की तुलना में थोड़ा कम खतरनाक है।इसका प्रभाव अफ्रीका, अमेरिका और दक्षिण व पश्चिम एशिया में अधिक रहता है।
प्लासमोडियम वाई वेक्स
इस पेरासाइटिक मलेरिया का प्रभाव पुरे विश्व मे दिखाई पड़ता है।इसके प्रभाव का अनुमान आप इस तरह से लगा सकते हैं कि भारत में मलेरिया बुखार से इंफेक्टेड (संक्रमित)होने वाले मरीजों में लगभग 60% मरीज प्लासमोडियम वाई वेक्स के होते हैं।इस प्रकार का पेरासाइटिक संक्रमण बहुत ही तेजी से फैलता है लेकिन इसमें मृत्यु दर काफी कम होता है।
प्लासमोडियम फेलकिपेरम
सबसे अधिक मृत्यु दर वाला पैरासाइटिक मलेरिया को प्लासमोडियम फेलकिपेराम के नाम से जाना जाता है। पूर्वी व दक्षिणी एशिया अफ्रीका और पूर्वी अमेरिका को इस मलेरिया से प्रभावित क्षेत्र माना जाता है।इस तरह के मलेरिया से संक्रमित रोगियों में पेट दर्द, उल्टी, दस्त, मांसपेशियों में दर्द पीठ में दर्द जैसे लक्षण दिखाई पड़ते हैं।
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मलेरिया से सावधानियां बचाव और उपाय
मलेरिया कैसे होता है तथा मलेरिया किसके द्वारा फैलता है के विषय में आपने ऊपर के लेख को पढ़ कर अच्छी तरह से समझ लिया होगा। अब आइए जानते हैं मलेरिया से सावधानियां बचाव और उपाय के संबंध में।
मलेरिया से बचाव/मलेरिया के लक्षण
- मलेरिया से संक्रमित मच्छर शाम या रात को ही किसी को काटते हैं इसलिए इस टाइम घर से निकलने में सावधानी बरतें।
- मलेरिया रोग ब्लड के आदान प्रदान से भी हो सकता है इसलिए सावधानी बरतें।
- हमेशा किसी भी प्रकार का इंजेक्शन नई डिस्पोजल सिरिंज से ही लगवाएँ।
- खुले में मौजूद पानी पर मच्छर अपना प्रजनन करते हैं इसलिए अपने आसपास गन्दे पानी को इकट्ठा न होने दे।
- ऊपर बताये गए लक्षण यदि दिखाई पढ़ें तो एंटीमलेरियल दवा डॉक्टर की सलाह पर इस्तेमाल करें।

मलेरिया का इलाज
आज का युग मेडिकल साइंस में बहुत तरक्की कर चुका है। इसलिए वर्तमान समय में मलेरिया की रोकथाम के लिए बहुत सारी दवाइयां उपलब्ध है।एंटीमलेरियल दवाओं का प्रयोग बुखार एवं अन्य लक्षण को कम करने के लिए किया जाता है।आगे की कड़ी में एंटीसिजिर व इलेक्ट्रोलाइट्स दवाएं भी फायदा पहुंचाने में काफी मदद करती हैं।
मलेरिया की दवा बताएं
- मेफ़्लोक्विन
- एटोवाकवोन प्रोगोआनिल आर्टिमेडर ल्यूमफैंट्रीम
- क्लोरोक्वीन और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन
- आट्रेमिसिनिन
मलेरिया बुखार में क्या खायें?
वैसे तो मलेरिया में किसी खास प्रकार के खाद्य पदार्थ को खाने की सलाह डॉक्टर्स द्वारा नहीं दी जाती है। लेकिन फिर भी कुछ डॉक्टर्स रोगी को अधिक कार्बोहाइड्रेट व प्रोटीन युक्त भोजन प्रयोग करने की सलाह देते हैं। मलेरिया से ग्रसित रोगियों का शरीर तेजी से कमजोर होने लगता है। इसीलिए शरीर की कमजोरी को दूर करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन युक्त भोजन करना अत्यंत फायदेमंद माना जाता है। पैरासाइटिक मलेरिया में आसानी से पच जाने वाले भोजन जैसे कि चावल आदि को अधिक वरीयता दी जाती है। रोगी को चाहिए की थोड़े-थोड़े समय पर कुछ ना कुछ खाता रहे शरीर में पानी की कमी को मेंटेन रखने के लिए तरल पदार्थ का भी इस्तेमाल करते रहना चाहिए।
निष्कर्ष
अयोध्या दर्शन के इस लेख के द्वारा पाठक साथियों को मलेरिया रोग कैसे होता है एवं मलेरिया के लक्षण कैसे होते हैं के विषय में सरल जानकारी देने का प्रयास किया गया है। यदि इस लेख से आपका ज्ञानवर्धन हुआ है तो कृपया लेख को शेयर करके अन्य जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने की कृपा करें।ताकि लेख में दी गई जानकारियों को प्रयोग करके वह लोग भी मलेरिया जैसी गम्भीर समस्या से अपना पीछा आसानी से छुड़ा सकें। लेख में दवाओं से संबंधित दी गई जानकारियां मात्र लोगों को जागरूक करने हेतु हैं किसी भी दवा को इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य ले ले।
FAQ
मलेरियासे ग्रसित रोगियों में निम्न लक्षण दिखाई देते हैं।(1)सिर दर्द (2)तेज बुखार (3)उल्टी (4)जूड़ी यानी ठंड लगना (5)मांशपेशियों में दर्द (6)रक्त में पतलापन
मलेरिया से संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से पेरासाइटिक मलेरिया का संक्रमण होता है।